वणी टाईम्स न्यूज | शहर के इस्लामपुरा (खरबडा मोहल्ला) क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से चल रहे अवैध गोवंश वध और मांस तस्करी के काले कारोबार के खिलाफ स्थानीय नागरिकों ने मोर्चा खोल दिया है। वणी पुलिस थाने के थानेदार को सौंपे गए एक विस्तृत निवेदन में नागरिकों ने मांग की है कि पिछले कई वर्षों से गौहत्या कर मांस की बिक्री करने वाले सलमान शकील शेख और नावेद शेख रियाज के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्यवाही की जाए व आरोपियों के अवैध निर्माण बुलडोजर से ध्वस्त किए जाए।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में 10 अप्रैल 2026 को गोकुल नगर हनुमान मंदिर और जत्रा मैदान के पास पुलिस ने आरोपियों के पास से 90 किलो गौमांस जब्त किया था। जिसके बाद से उक्त दोनों आरोपी फरार हैं। नागरिकों का आरोप है कि यह गिरोह निर्गुडा नदी के किनारे और अपने घरों में अवैध रूप से मवेशियों को काटकर गौमांस की होम डिलीवरी का कार्य कर रहा था। इतना ही नहीं बल्कि वणी शहर व आसपास के गांवों से 1200 से ज्यादा मवेशियों के गायब होने के पीछे भी आरोपियों व उनके परिवार का हाथ बताया जाता है।
निवेदन में नागरिकों ने गौहत्या में लिप्त उक्त आरोपियो के घरों में घातक शस्त्र होने की आशंका भी जताई है। मोहल्ले के निवासियों का कहना है कि इन आरोपियों के आपराधिक कृत्यों के कारण पूरे इस्लामपुरा क्षेत्र के निर्दोष नागरिकों को समाज में संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है, जिससे सामाजिक शांति भंग होने का खतरा पैदा हो गया है।

नागरिकों ने मांग की है कि फरार आरोपियों और उनके परिवार पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, आरोपियों के पास मौजूद घातक हथियारों को जब्त करने और उनके द्वारा किए गए अवैध निर्माणों पर ‘बुलडोजर’ चलाने की मांग भी की गई है। इस निवेदन की प्रतियां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे और पुलिस महानिरीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई हैं।
गोवंश हत्या बंदी कानून सिर्फ कागजों में ?
राज्य में गौवंश हत्या, गौमांस बिक्री व बीफ खाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। बावजूद इसके वणी शहर परिसर में बीफ का कारोबार धड़ल्ले से शुरु है। शहर के अनेक होटलों में मटन बिरयानी के नाम पर बीफ परोसा जा रहा है। गौहत्या प्रतिबंध कानून का अनुपालन करने की जवाबदारी स्थानीय प्रशासन व पुलिस विभाग की है। मगर नगर परिषद प्रशासन व पुलिस विभाग दोनों इस बारे में उदासीन दिखाई दे रहे है। जिसकी वजह से गौहत्या प्रतिबंध कानून सिर्फ कागजों में दिखाई दे रहा है।










