जितेंद्र कोठारी, वणी : अपने निजी फायदे के लिए जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे राजनेता व अधिकारी किस तरह लुटा रहे है। इसका ताजा उदाहरण शहर की वो इमारतें है जो बनने के वर्षों बाद भी आज तक आम जनता के उपयोग में नहीं आ सकी है। नेताओं की मर्जी, शासन की अनदेखी व अधिकारियों की लापरवाही के चलते अनावश्यक रूप से बनाई गई यह इमारतें धीरे धीरे खंडहर के रूप में तब्दील हो रही है।

लगभग 50 वर्ष पूर्व वणी शहर की पहचान सांस्कृतिक व साहित्यिक शहर के रूप में थी। लेकिन कंप्यूटर, मोबाइल व VFX के जमाने धीरे धीरे यह पहचान लुप्त हो गई। रंगमंच पर नाटक के प्रदर्शन की कला कुछ शहरों तक सीमित रह गई। ऐसे में 2 वर्ष पूर्व तत्कालीन विधायक ने शहर के मध्यभाग में सरकारी जमीन पर 5 करोड़ रुपए की लागत से शानदार सांस्कृतिक सभागृह का निर्माण करवाया। विशाल रंगमंच, लेजर लाइट, 3D साउंड सिस्टम व आरामदायक फोम की कुर्सियों वाला यह नवजात सभागृह पिछले 2 साल से मुख्यमंत्री के हाथों उदघाटन के इंतजार में बूढ़ा हो रहा है। सभागृह के मुख्य द्वार के सामने और आसपास झाड़ियां उग आई है। इमारत के ठेकेदार को बिल व नेताओं को कमीशन मिल चुका है ऐसे में शहर की आम जनता इस भव्य नाट्यगृह का आनंद कब ले पाएगी ? यह अभी तक कोई नही जानता ।
मरीजों की सुविधा के लिए वणी ग्रामीण अस्पताल परिसर में बनकर तैयार ट्रामा केयर सेंटर की परिपूर्ण इमारत वर्षों से खड़ी है।आवश्यक मशीनरी व स्टाफ की कमी के कारण वणी का ट्रामा केयर सेंटर केवल शोपीस बन कर रह गया है। ट्रामा केयर सेंटर में 100 बेड का अस्पताल शुरू करने को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने कई दफा आंदोलन भी किया। चुनाव के समय नेताओं ने ट्रामा केयर सेंटर शीघ्र शुरू करने का आश्वाशन दिए। मगर प्रशासन की लालफीताशाही के चलते ट्रामा केयर सेंटर 5 वर्ष बाद भी मरीजों के इंतजार में खाली पड़ा है।

शहर के हृदय स्थल आंबेडकर चौक परिसर में नगर परिषद द्वारा लगभग 15 वर्ष पूर्व निर्मित कल्याण मंडपम की इमारत अब खंडहर होने की कगार पर है। लावारिस पड़ी इस इमारत व परिसर का उपयोग ट्रांसपोर्ट कंपनियों का माल उतारने व अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए हो रहा है। इमारत की मरम्मत कर समारोह, सभा व अन्य मांगलिक कार्यों के लिए किराए से दिए जाने पर नगर परिषद की आय में बढ़ोतरी हो सकती है। मगर नेताओं व अधिकारियों को इससे क्या लेना देना।











