जितेंद्र कोठारी, वणी |


अहिंसा व करुणा के अवतार जैन धर्म के 24 वे व अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव (महावीर जयंती) वणी में धूमधाम से मनाया गया। जैन समाज के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक इस त्यौहार के अवसर पर जैन समाज के श्वेताम्बर, दिगंबर, मूर्तिपूजक व तेरापंथ जैन समाज के हजारों लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
महावीर जयंती के उपलक्ष में सकल जैन संघ वणी के तत्वाधान में 28 से 31 मार्च तक विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया था। महावीर जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार 30 मार्च को स्थानीय नगरवाला कंपाउंड में ‘ एक शाम महावीर के नाम ‘ भक्ति संध्या का आयोजन किया गया । इस भक्तिमय कार्यक्रम में मुंबई से आए प्रख्यात जैन भक्ति गायक भरतभाई ओसवाल ने अपनी समधुर वाणी में हिंदी, मराठी, गुजराती व मारवाड़ी भाषा में भक्ति गीतों पर श्रेताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

मंगलवार 31 मार्च को सुबह जैन स्थानक में प्रवचन व उसके पश्चात श्री संभवनाथ श्मंवेताम्बर जैन मंदिर में भगवान महावीर के 14 सपनो की बोलियां लगाई गई। सुबह 10.30 बजे जैन मंदिर से बैंडबाजा व सजे हुए रथों के साथ प्रारंभ हुई भव्य शोभायात्रा में धवल वस्त्र पहने जैन समाज बंधु व लाल साड़ियों में हजारों महिला श्रद्धालु शामिल हुए। शहर के गांधी चौक, जैन स्थानक, टैगोर चौक, आंबेडकर चौक, छत्रपति शिवाजी महाराज चौक, खाती चौक होते हुए शोभायात्रा का जैन मंदिर पर समापन हुआ। सभी कार्यक्रमो के पश्चात स्थानीय महावीर भवन में गौतम प्रसादी (स्नेह भोजन) का आयोजन किया गया।

कौन थे महावीर स्वामी?
भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। उन्हें एक महान आध्यात्मिक गुरु माना जाता है, जिन्होंने लोगों को सही रास्ता दिखाया था. भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में बिहार के वैशाली जिले के कुंडलग्राम में हुआ था। वे एक राजघराने में जन्मे थे, लेकिन उन्होंने सच्चाई की खोज के लिए राजसी जीवन छोड़ दिया था। कहते हैं कि 30 साल की उम्र में महावीर स्वामी ने घर-परिवार छोड़ दिया था। जिसके बाद वे कठोर तपस्या और ध्यान में लग गए थे। कई सालों की साधना के बाद उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपना जीवन लोगों को सही मार्ग दिखाने में लगा दिया था। 72 साल की उम्र में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया।










