वणी टाईम्स न्यूज | Western Coalfields Limited (WCL) की खदान से रेलवे साइडिंग के लिए रवाना हुए दो ट्रकों में कोयला हेराफेरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना के 48 घंटे बीत जाने के बावजूद पुलिस थाने में किसी भी आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से पूरे प्रकरण पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि इस मामले में कोयला व्यापारी, ट्रांसपोर्टर के साथ कुछ प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों की भी कथित भूमिका हो सकती है।
क्या है पूरा मामला ?
सोमवार, 23 फरवरी की शाम कृष्णा इंफ्रा कंपनी के हायवा ट्रक क्रमांक CG-11-BM-9033 और CG-11-BM-3214 उकनी कोयला खदान से कोयला भरकर वणी रेलवे साइडिंग के लिए रवाना हुए थे। रात लगभग 10 बजे साइडिंग पर पहुंचने के बाद ट्रकों के लोड पर संदेह होने पर जांच की गई। प्राथमिक जांच में पाया गया कि ट्रकों में उच्च ग्रेड कोयले के स्थान पर कोयले की चूरी और बेड मैटेरियल भरा हुआ था। इसके बाद साइडिंग प्रबंधन ने तत्काल WCL अधिकारियों और सुरक्षा दल को सूचना दी।
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा
सुरक्षा कर्मियों द्वारा हिरासत में लिए गए दोनों चालकों ने कथित रूप से बताया कि खदान से भरा गया असली कोयला यवतमाल मार्ग पर रामदेवबाबा मंदिर के पास स्थित एक निजी कोयला प्लॉट पर खाली किया गया था। इसके बाद कोल वाशरी के समीप स्थित दूसरे प्लॉट से बेड मैटेरियल भरकर रेलवे साइडिंग पर लाया गया। गंभीर पहलू यह है कि सुरक्षा निगरानी में होने के बावजूद दोनों चालक रात के समय फरार हो गए, जिससे पूरे घटनाक्रम पर और संदेह गहरा गया है।
FIR दर्ज नहीं, सवालों के घेरे में कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, लाखों रुपये मूल्य के कोयले की हेराफेरी की शिकायत दर्ज कराने के लिए WCL के वरिष्ठ अधिकारी मंगलवार देर रात तक वणी पुलिस थाने में मौजूद रहे। इसके बावजूद 48 घंटे बाद भी किसी भी आरोपी के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि मामले को दबाने के लिए कुछ रसूखदार नेताओं और अधिकारियों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। इस वजह से जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
कोयला तस्करी नेटवर्क की जड़ें मजबूत
वणी क्षेत्र में कोयला चोरी और तस्करी की गतिविधियां लंबे समय से चर्चा में रही हैं। आरोप है कि ट्रांसपोर्ट कंपनियों की मदद से उच्च गुणवत्ता वाला कोयला बीच रास्ते में उतारकर उसकी जगह निम्न गुणवत्ता का कोयला या चूरी रेलवे साइडिंग तक पहुंचाया जाता है। सूत्र बताते हैं कि इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने के लिए संबंधित विभागों में मासिक स्तर पर सांठगांठ की व्यवस्था कायम रहती है। यही कारण है कि अब तक कोयला तस्करों के खिलाफ कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण ने न केवल कोयला आपूर्ति व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है, ताकि दोषियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। यदि शीघ्र ही प्राथमिकी दर्ज कर पारदर्शी जांच नहीं की गई, तो यह मामला व्यापक जनाक्रोश का रूप ले सकता है।










