वणी टाईम्स न्यूज । वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के चंद्रपुर और वणी क्षेत्र में कर्मचारियों की यूनिफॉर्म खरीद को लेकर एक बड़े घोटाले की आहट सुनाई दे रही है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्थानीय कपड़ा दुकानदारों और डब्लू सी एल कर्मचारियों की मिलीभगत से यूनिफॉर्म खरीदी का फर्जी जीएसटी (GST) इनवॉयस बनाकर कंपनी को लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
ऐसे चल रहा है फर्जी बिलों का खेल
कोल इंडिया व वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के नियमों के मुताबिक, प्रत्येक कर्मचारी को सालाना यूनिफॉर्म, जूते और अन्य आवश्यक परिधान खरीदने के लिए ₹12,500 की अग्रिम (एडवांस) राशि दी जाती है। इस राशि को क्लेम करने के लिए वैध जीएसटी नंबर वाला पक्का बिल कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है। परंतु, चंद्रपुर और वणी क्षेत्र के कोल कर्मचारियों व कई कपड़ा दुकानदारों ने इसका अवैध रास्ता निकाल लिया है।
ये दुकानदार कर्मचारियों से GST राशि और कुछ कमीशन लेकर बिना कोई कपड़ा बेचे ही पूरे ₹12,500 का फर्जी पक्का बिल (Fake Invoice) थमा रहे हैं। कुछ मामलों में कर्मचारी मात्र एक जोड़ी कपड़े खरीद रहे हैं और दुकानदारों से मिलीभगत कर पूरी राशि का बढ़ा-चढ़ाकर फर्जी बिल विभाग में जमा करा रहे हैं। इस खेल में सरकार और कंपनी दोनों को सीधे तौर पर धोखा दिया जा रहा है
वेकोली अधिकारी नहीं है अनजान !
वेकोली कर्मचारियों द्वारा यूनिफॉर्म खरीदी में जारी गड़बड़ी के बारे वेस्टर्न कोलफील्ड वणी नॉर्थ के अधिकारियों को भी जानकारी है। मगर अधिकारियों द्वारा उक्त गड़बड़ी की जांच नहीं किया जाना भी जांच का विषय है। यूनिफॉर्म खरीदी के बारे में पारदर्शी जांच कराई जाए तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है और कंपनी के लाखों रुपये बचाए जा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि झारखंड में कोल इंडिया के कर्मचारियों द्वारा इसी प्रकार की गड़बड़ी की जानकारी के बाद कोल इंडिया द्वारा जीएसटी पोर्टल से बिलों का सत्यापन व रिकॉर्ड ऑडिट प्रक्रिया शुरू की गई है। एक तरफ जहां कर्मचारी बिना ड्रेस खरीदे या कम दाम की ड्रेस लेकर पूरी ₹12,500 की राशि हड़प रहे हैं।वही दूसरे ओर दुकानदार फर्जी बिल जनरेट कर सरकार को देय इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और वास्तविक जीएसटी लेन-देन के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर रहे हैं।










