वणी टाइम्स न्यूज | यवतमाल जिले के वणी क्षेत्र में सोमवार 8 जून की शाम हल्के भूकंप के झटके दर्ज किए गए। राष्ट्रीय भूकंपशास्त्र केंद्र द्वारा प्रकट जानकारी के अनुसार, शाम 5 बजकर 8 मिनट पर आए इस भूकंप का केंद्र वणी से लगभग 54 किलोमीटर दूर स्थित था तथा इसकी गहराई धरातल से करीब 12 किलोमीटर नीचे थी। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है।
वणी और चंद्रपुर क्षेत्र विदर्भ के महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्रों में गिने जाते हैं। वर्धा वैली कोलफील्ड महाराष्ट्र के सबसे बड़े कोयला क्षेत्रों में से एक है, जिसका विस्तार यवतमाल और चंद्रपुर जिलों तक फैला हुआ है। राजूर-वणी, न्यू माजरी तथा आसपास के क्षेत्रों में अनेक खुली और भूमिगत कोयला खदानें दशकों से संचालित हो रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कम तीव्रता वाले भूकंप सामान्यतः प्राकृतिक भूगर्भीय गतिविधियों के कारण आते हैं। हालांकि, दुनिया भर में हुए कई अध्ययनों में यह उल्लेख किया गया है कि बड़े बांध, जलाशयों में संग्रहित विशाल जलराशि का दबाव तथा बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां स्थानीय भूगर्भीय तनावों को प्रभावित कर सकती हैं। महाराष्ट्र के कोयना बांध क्षेत्र में वर्ष 1967 में आया 6.6 तीव्रता का भूकंप जलाशय-प्रेरित भूकंप (Reservoir Induced Seismicity) का प्रमुख उदाहरण माना जाता है।
वणी क्षेत्र में अपर वर्धा, निलजई, इरई, घोड़ाझरी सहित अनेक मध्यम और लघु सिंचाई परियोजनाओं के जलाशय मौजूद हैं। इसके साथ ही यहां बड़े पैमाने पर कोयला उत्खनन भी जारी है। ऐसे में भूकंप की घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच विभिन्न प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, वर्तमान में आए 3.0 तीव्रता के भूकंप का सीधा संबंध खनन गतिविधियों या बांधों से है, ऐसा कोई आधिकारिक वैज्ञानिक निष्कर्ष अब तक सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में चंद्रपुर जिले में भी 3.1 से 3.4 तीव्रता के हल्के भूकंप दर्ज किए गए हैं। इसके चलते विदर्भ के इस क्षेत्र में हो रही भूकंपीय गतिविधियों पर भूगर्भ वैज्ञानिकों और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की विशेष नजर बनी हुई है।
स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है तथा किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन से संपर्क करने को कहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि 3.0 तीव्रता का भूकंप हल्की श्रेणी में आता है और सामान्यतः इससे बड़े नुकसान की संभावना नहीं होती।











