जितेंद्र कोठारी, वणी | मारेगांव तहसील के मार्डा बांध के सुनसान जंगल में पड़े एक सड़े-गले शव ने रविवार को पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। शव इतना बुरी तरह गल चुका था कि उसका चेहरा पहचानना तो दूर, यह बताना भी मुश्किल था कि वह आखिर कौन है। शरीर पर गहरे जख्म थे, जो साफ बता रहे थे कि यह कोई साधारण मौत नहीं बल्कि बेरहमी से की गई हत्या थी।
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था—“मृतक कौन है और उसे मौत के घाट किसने उतारा?” लेकिन महज 24 घंटे के भीतर पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर की ऐसी गुत्थी सुलझाई कि हर कोई हैरान रह गया। हत्या के पीछे निकली कहानी अवैध संबंधों, पारिवारिक बदनामी और खूनी साजिश की थी।
जंगल में मिली लाश, पहचान मिटाने की थी पूरी कोशिश
यवतमाल और चंद्रपुर जिले की सीमा पर स्थित मार्डा बांध परिसर के जंगल में एक गहरे गड्ढे में ग्रामीणों को सड़ी-गली लाश दिखाई दी। सूचना मिलते ही मारेगाव पुलिस मौके पर पहुंची। शव की हालत इतनी खराब थी कि पहचान कर पाना लगभग असंभव था। हत्यारों ने ऐसा कोई सामान भी नहीं छोड़ा था जिससे मृतक की पहचान हो सके। न मोबाइल, न पहचान पत्र और न ही कोई अन्य दस्तावेज।
मगर पुलिस की नजर दो चीजों पर जाकर ठहर गई—मृतक के हाथ में पहना हुआ चांदी का कड़ा और शव के पास पड़ी तंबाखू की डिब्बी। यही दो मामूली दिखने वाली वस्तुएं आगे चलकर पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने वाली थीं।
पुलिस ने पकड़ा एक छोटा सा सुराग
हत्या के इस मामले की जांच के लिए जिला पुलिस अधीक्षक कुमार चिंता के निर्देश पर मारेगाव और शिरपुर पुलिस की संयुक्त टीम जांच में जुट गई। तफ्तीश के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि बुधवार को वरोरा रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक देशी शराब दुकान पर कुछ लोगों के बीच जोरदार विवाद हुआ था। यही सूचना जांच की दिशा बदलने वाली साबित हुई। पुलिस उस विवाद में शामिल लोगों की तलाश करते हुए वरोरा तहसील के नागरी गांव पहुंची। गांव में पूछताछ शुरू हुई तो एक नाम बार-बार सामने आने लगा—शांतनु झाड़े।
पुलिस के सवालों के आगे टूट गया राज
पुलिस ने शांतनु झाड़े (18) को हिरासत में लिया। शुरू में उसने खुद को पूरी घटना से अनजान बताया। लेकिन जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ी, उसके जवाब बदलने लगे। आखिरकार पुलिस के सवालों के दबाव में उसने पूरा सच उगल दिया। शांतनु के बयान के बाद पुलिस ने आपटी निवासी प्रवीण वरघने (35) और दांडगांव निवासी राजू ढेंगळे (35) को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों की गिरफ्तारी के साथ ही हत्या की पूरी कहानी सामने आ गई।

अवैध रिश्ता बना मौत की वजह
जांच में पता चला कि मृतक विनोद प्रहलादराव सहारे (35) चंद्रपुर जिले के सिंदेवाही तहसील के मरेगांव का रहने वाला था। वह पिछले करीब 6 वर्षों से नागरी गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता था। इसी दौरान गांव की एक महिला से उसके संबंध बन गए। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं और यह रिश्ता गांव में चर्चा का विषय बन गया।
जब महिला के पुत्र को इस संबंध की जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध शुरू कर दिया। महिला के भाई प्रवीण वरघने ने भी कई बार विनोद को समझाने और संबंध खत्म करने की कोशिश की। लेकिन विनोद पीछे हटने को तैयार नहीं था।
यहीं से नफरत और बदले की कहानी शुरू हुई।
बदनामी से परेशान परिजनों ने रची हत्या की साजिश
गांव में लगातार हो रही चर्चा और परिवार की बदनामी से नाराज महिला के पुत्र ने विनोद को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। उसने अपने मामा प्रवीण वरघने से संपर्क किया। प्रवीण ने अपने दोस्त राजू ढेंगळे को भी इस योजना में शामिल कर लिया। इसके बाद विनोद की हत्या का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया।
शराब पार्टी के बहाने बुलाया, फिर मौत के सफर पर ले गए
योजना के अनुसार शुक्रवार को प्रवीण ने विनोद को फोन कर वरोरा बुलाया। विनोद ट्रेन से नागरी से वरोरा पहुंचा। रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित एक देशी शराब दुकान पर प्रवीण, राजू और विनोद ने साथ बैठकर शराब पी। प्रत्यक्षदर्शियों ने तीनों के बीच वहां बहस और झगड़ा भी देखा था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह विवाद कुछ ही घंटों बाद खूनी अंजाम तक पहुंच जाएगा।
बीयर की बोतल से हमला, फिर पेड़ की टहनी से कुचल दिया सिर
शराब पीने के बाद तीनों विनोद को मोटरसाइकिल पर बैठाकर मार्डा बांध की ओर ले गए। दोपहर करीब एक बजे सुनसान इलाके में फिर विवाद शुरू हो गया।अचानक एक आरोपी ने पास पड़ी बीयर की खाली बोतल फोड़कर विनोद पर हमला कर दिया। टूटे कांच से हुए हमले में विनोद लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद भी हमलावरों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। राजू ने पास के पेड़ की मोटी टहनी तोड़ी और विनोद के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। कुछ ही पलों में विनोद ने मौके पर दम तोड़ दिया।
जंगल के गड्ढे में फेंक दी लाश
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को घसीटकर पास के जंगल में स्थित एक गहरे गड्ढे में फेंक दिया और मौके से फरार हो गए। भीषण गर्मी के कारण लगभग 48 घंटे तक शव वहीं पड़ा रहा। तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते शव बुरी तरह सड़ चुका था। हत्यारों को लगा कि पहचान मिट चुकी है और अब वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे। लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि एक चांदी का कड़ा और तंबाखू की डिब्बी उनके लिए फांसी का फंदा बन जाएंगे।
मामूली सुरागों ने पहुंचाया सलाखों के पीछे
पुलिस ने घटनास्थल से मिले हर छोटे-बड़े सुराग को जोड़ा। चांदी के कड़े, तंबाखू की डिब्बी, वरोरा शराब दुकान पर हुए विवाद और गांव में चल रही चर्चाओं की कड़ियां मिलाते हुए पुलिस आखिरकार हत्यारों तक पहुंच गई। महज 24 घंटे में ब्लाइंड मर्डर का पर्दाफाश कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा जिला पुलिस अधीक्षक कुमार चिंता, उप अधीक्षक अशोक थोरात तथा उपविभागीय पुलिस अधिकारी सुरेश दळवे के मार्गदर्शन में किया गया। कार्रवाई में मारेगाव के पुलिस निरीक्षक श्याम वानखेड़े, शिरपुर के सहायक पुलिस निरीक्षक संतोष मनवर, सहायक फौजदार दिगंबर किनाके, पुलिस उपनिरीक्षक प्रमोद जिद्देवार, सागर दीपेवार, राजन इसनकर, इकबाल शेख तथा अजय वाभिटकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।











